Saturday, May 9, 2009

पर्यावरण कुदरत की नही हमारी है.. ??????


"""कुदरत की बनी दुनिया को छोटा मत करो ,भागते हुए इस दुनिया को खोटा मत करो ,, कहाँ तक जायेगे हम ,ये कुदरत सवाल हर जगह करेगी ,,, जवाब हमारे पास ही है इसे अनदेखा मत करो ?????????????



""""पर्यावरण बचाओ ,जीवन मैं अधिक खुशियाली लाओ,सब मिलकर हर खुशी मैं एक पौधा लगाओ

Sunday, March 22, 2009

अमूल्य पानी ब्रांडेड दाम .......

...........********...................********....................
पानी कितना मूल्यवान है हम सब को पता है ,लेकिन हम इसे पीने के लिए ब्रांडेड की ही तरफ़ ही क्यों जाते है ,क्या अपनी प्यास ब्रांडेड दाम से ही बुझती है , मेरे ख्याल से नही होना चाहिये , की पानी का दाम ब्रांड के हिसाब से हो ,ज़रा ध्यान से सोचना चाहिए ........
की एक ग्लास जूस ,एक बोतल कोल्ड्रिंक दस रूपये मैं जाते हैं , फिर भी पानी १२,१४,१६ रूपये का आता है ,हम सब मिलकर कम्पनी के खिलाफ लड़ तो सकते है ,जब तक हम लडेंगे नही तो हम जीतेंगे नही और ये पानी के ब्रांडेड दाम बढ़ते जायेंगे | बाज़ार मैं १० से १५ ब्रांडेड पानी की बोतल है ,लेकिन उनके दाम अलग -अलग है | हाँ हर कम्पनी आय .अस .. प्रमादित रहते है , सब मैं कुछ कुछ एक्स्ट्रा होता है ,जिस तरह से विज्ञापन मैं दिखाते है ,की ये गंगा का साफ़ पानी है या फिर हिमालय के पहाडो का साफ़ पानी है या साफ़ झरने का पानी ये सब दिखाकर हमसे मनमाना मूल्य लूट रहे हैं ,और हम बेवकूफ दे भी रहे हैं .... आपको पता है पानी रुपए और बोतल रुपए की होती है तो टोटल रुपए .... फिर भी ये हमें १२ रुपए मैं मिलते है .... इसका मतलब है की हमे पानी भी रुपए मह्गां मिलता है | आपको पता होना चाहिए , की सब तरह का पानी साफ़ रहता है ,कम्पनी दिखाकर इसे साफ़ बताते हैं .... ये पैक कब हुआ ये सब आपको डेट से पता चलता है ,,,, लेकिन वो केसे पैक हुआ ये आपको पता नही चलता है .... और आप पता भी नही कर सकते हैं क्योंकि टाइम नही है आपके पास ये प्रोब्लम सबकी है ....लेकिन आज नही तो कल इससे लड़ना पड़ेगा ....तो आज से ही सूरवात क्यूं नही करते हैं | अगर आपको यह पढ़ने के बाद कुछ बात असर करती है ,, तो अपनी विचार मुझे देना ......... प्रोब्लम है तो सौलुशन तो होगा ही ............. लास्ट दो लाइन ////////// "कुदरत का यह वरदान है पानी.... बेचूं इसे मनमाने दाम मैं ....पानी तो है पर विश्वास तो मत तोड़ो लोगो का , ये बात ध्यान रखना की प्रकृति को बेचोगे ... तो एक दिन वह तुम्हे बेचं देगी..... '"" पानी का मूल्य हम सबके लिए अमूल्य है.... पहचानो इसे ना बेचों इसे ............... मेरे सुझाव --------- ) पानी की बोतल का इस्तमाल करने के बाद अगर उसे वापिस कर दिया जाय तो आधे रुपए वापिस हो जायेंगें इसे सबको फायदा होगा विचार करना,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
आप भी सुझाव दो इसके बाद ........... अगले बार एक अलग प्रोबलम और सुझाव के साथ मिलूँगा .................. अपने विचार और प्यार मुझे जरूर देना...................................खुदा आफिस ........

Wednesday, March 18, 2009

काम बस काम ये कब तक चेलेगा ......


जबलपुर ९३.५ रेडियो

कोई तो बताओ कब तक काम करें हम .........................


काम ही काम रहता है क्या दुनिया मैं .................................


कोई तो सुनो हमारी फरियाद को जो बदल दे हमारी वक्त की रफ़्तार को ............................


हम तो बढ़ रहे हैं पर कोई साथ नही चल रहा है............


अगर साथ आना है तो उम्मीद मत लाना की कुछ बदल जाएगा ..............................


क्योंकि आप बदले तो दुनिया नही बदलेगी ,आप को बदलना पड़ेगा ................


पर हमारा रेडियो स्टेशन ९३.५ अब बदलेगा क्योंकि १ साल पूरे हो गए हैं ............................................


ढेर सारी खुसी मिले हमें और आप का प्यार............ झूमो जमके झूमो ..............................

Tuesday, March 17, 2009

मुमकिन मौत है नामुमकिन ज़िन्दगी नही ..... ........



"मौत" और ज़िन्दगी को किसने अलग किया वो तो अपने पास है ......पर वह ज़िन्दगी मैं मौत कुछ खास है ,मुमकिन तो है मौत पर नामुमकिन है "ज़िन्दगी " पर जो जीने के लिए खास है ,वो एक दुसरे का साथ है ....


वक्त कहता है --दिन बदल जाते हैं पर आने वाली मौत कभी नही बदलती है ,पर उस मौत को प्यार से हराकर


ज़िन्दगी को जीत सकते हैं ...जो इस सच को जान लिया उसने ज़िन्दगी और मौत के उस पार की ज़िन्दगी जिए ली ..... कहते हैं की मौत साथ -साथ चलती है तो ज़िन्दगी किस के साथ चलती है .....ये किसे पता है तो बताना .....अब तो सफ़र हर समय मुझसे पूछता है की मंजिल दूर नही तो मंजिल से दूर होता क्यों जा रहा है..........


इस लिए तो मुमकिन मौत पर नामुमकिन ज़िन्दगी कट रही है................??????.


अब आप की बारी है .............मुझे बताने की.............इंतज़ार रहेगा .....अलविदा कहता हूँ ........




अब कुछ अलग विषय पर मिलूँगा ..............................

Saturday, December 6, 2008

लड़ रहे है हम कहाँ पर सुनो आवाज़ ....अपनी ....


"ज़िन्दगी एक सफ़र है तो हम हैं ,एक राही जो बदलेगा.......अपना रास्ता

हमें उन लोगो के बारे मैं भी सोचना है जो रास्ते मैं तो हैं पर ज़िन्दगी को बहुत सादगी से

जी रहे हैं ".........................

मुझे आप लोग से बस इतना पूछना है की आप लोग कहाँ रहना पसंद करोगे.................

हम कहाँ जा रहें हैं ये हमें पता है क्या .....................तो मैं बताता हूँ //////////


" हम उस दौड़ मैं दौड़ रहें हैं जहाँ सिर्फ़ हम हैं और कोई नही ॥

हारने की आदत तो नही थी पर अब जीतने के लिए तरश रहें है, हम॥

खो चुके हैं हम अपने आप को और अब पाने की कोशिश कर रहें हैं हम.........

कहाँ है हम और आप उस घड़ी को याद करो जो हमें समय बताती थी.....

अब हम उसे समय बतातें हैं की दिन मैं रात हैं ,और रात मैं दिन ........

अब तो समझ गए हो की मैं क्या कहना चाह रहा हूँ "................

मुझे अपनी राय जरूर बताना ................. अब आप के जवाब के बाद मिलूँगा ...........

Monday, October 27, 2008

त्योहारों की मस्ती मैं डूबा शहर.........





"त्योहारों का माहौल तो बड़ा जबरदस्त चल रहा है ,और साथ-साथ सबकी छुटियाँ और खुशियाँ साथ चल रही है, पर हम रेडियो की दुनिया सबसे निराली हैऔर आपके लिये तो खुशियाँ के साथ झूमने वाले गाने भी सुनाते है ,आप को रखते है आगे' हवे के साथ देतें हैं हर तरह कि न्यूज़ जिसमें ना तो आपका पैसा लगता है ,ना ही बिजली बस दो सैल लिया और कहीं भी चला लियाऔर पा ली मन कि तंदुरस्ती ,ये सब देते हैं आपके आर .जे .बोले तो" रेडियो मैं बोले लगातार बार -बार" जो अपनी खुशियों को किनारे रखते हुए,आपके लिए हर समय मनोरंजन के खजाने ढूंढ़ते रहते हैं ,कभी हमारे दुनिया मैं आ के देखो तो हम आपसे सिर्फ प्यार मांगते रहते हैं. और हर गम को पीते हुए ,जोकर की तरह हंसते रहते है.क्योंकि "राजकपूर"ने कहा था जीना यहाँ मरना यहाँ इसके सिवा जाना कहाँ ,ये सब रेडियो मैं काम कर रहें हैं हर एक लोगौं के लिए है जो १८ घंटे तक काम करते हुए आपका मनोरंजन करता है और ६ घंटे सोते हुए ,भी २४ घंटे गाने सुनाते हैं फिर भी लोग कहते है की इनकी दुनिया एकदम फ्री है यानी की आराम है .यहाँ पर हर पल, हर समय के साथ सेकेण्ड तक मैं वयस्त हैं "" इनमें दो लाइन ये कहती है ---






"समय तो हमारे साथ है ,हर सेकंड की आस है ,फिर भी लोगों से प्यार पाने की प्यास है"


" क्यूं की हमारी प्यास आप लोग ही बुझाते हो -------



"चलो आज का समय समाप्त हुआ ,बाकि आने वाले समय मैं बताऊंगा .......... .



Saturday, October 25, 2008

छूट चुकी है ज़िन्दगी की रेल ......




"जा चुके है सब और वही खामोशी छायी है,पसरा है हर ओर सन्नाटा, तन्हाई मुस्कुराई है, छूट चुकी है रेल ,चंद लम्हों की तो बात थी,
क्या रौनक थी यहॉं,जैसे सजी कोई महफिल खास थी,
अजनबी थे चेहरे सारे,फिर भी उनसे मुलाक़ात थी,
भेजी थी किसी ने अपनाइयत,सलाम मे वो क्या बात थी,
"एक पल थे आप जैसे क़ौसर,अब बची अकेली रात थी,
चलो अब लौट चलें यहॉं से,छूट चुकी है रेलये अब गुज़री बात थी,
काग़ज़, करते बयान्‍,इनकी भी किसी सेदो पल पहले मुलाक़ात थी,
बढ़ चले क़दम,कनारे उन पटरियोंकहानी जिनके रोज़ ये साथ थी,
फिर आएगी दूजी रेल,फिर चीरेगी ये सन्नाटाजैसे जिन्दगी से फिर मुलाक़ात थी,
लौटेंगे और,भारी क़दमों से,जेसेकोई गहरी सी बात थी,
छूट चुकी है रेल,अब सिर्फ काली स्याहा रात थी
....... अब आप लोग समझ सकते है ज़िन्दगी के रफ़्तार को ........

Friday, October 24, 2008

बदलता त्योहारों का मज़ा.......


"" हम तो जानते हैं की त्योहारों का मौसम आ चुका है और अब तो लगातार हम आप लोग मस्ती करतें रहेंगे ,लेकिन इस बात को भी ध्यान रखना पड़ेगा की इस वर्ष हमारें यहाँ पर बहुत कुछ ऐसा हुआ है, कि हम नही भूल सकते हैं फिर भी हमलोग मस्ती तो करेंगे ? मैंने कुछ लाइन लिखी है, इसे ध्यान से पढें........


"खुशी तो है पर गम भी है, जीतना भी है पर हारने का गम भी होगा

"खुशियों को पाना भी है , पर खोने का गम भी होगा"
"लड़ना है हर परिस्थितियों से ,पर रुकने का डर भी होगा
" बदल दो इस बात को कि हम जीत नही सकते ,हारना अब हर दुश्मन को होगा "


" इसे ज्यादा क्या लिखूं अब आप ही समझ सकतें हैं.....बस थोड़ा सा और इंतजार करें ??????

Thursday, October 16, 2008

आदमी की मज़बूरी

ऐसी महगाईं मैं क्या करें आदमी, पेट बच्चों का केसे भरें आदमी
खून पसीना बहाकर भी रोटी नही ,केसे अपना गुजरा करें आदमी
बिक चुके सारे नेता मेरे देश के ,केसे सरहद पे जाकर लड़े आदमी
दोरे-हाज़ीर मैं बच्चें जवां हो गए ,और कितनी तरक्की करें आदमी
आज कहने को 'सादाब ' मज़बूर हैं ,सक्ल से हयवां लगे आदमी "